नवीन कपड़ों के खड़े किये गए खंभों से सुशोभित मण्डप की उंचाई से आकाश को दकने वाले तंबुओं से वह सेना सुशोभित थी। अनेक रंगों से रंगीन बैठकें सभामण्डप के अंदर फैली हुई थी, पसंदीदा अनेक वस्तुओं से निर्मित समुहों से वह सुशोभित था, उंचे छतों की छाया से उसके अंदर का प्रांगण शोभायमान था, समीप ही अग्रभाग पर घोड़े बंधे हुए थे, मदमस्त हाथियों के समूह के गर्जन से दिशाएं परिपूर्ण हो गई थी, अहर्निश रक्षा करने वाले बंदूकधारी, धनुर्धारी, ढाल एवं तलवारों को धारण करने वाले, अनगिनत परशुधारी, भाला धारण करने वाले, ऐसे अनेक व्यक्ति आस-पास खड़े होकर उसकी आठों दिशाओं से रक्षा कर रहे थे, अनेक नगाड़ों एवं प्रचंड वाद्यों की ध्वनि से वह भयंकर प्रतीत हो रहा था, अनेक प्रकार के कार्यों में व्यक्त कारीगरों के कोलाहल से वह व्याप्त हो गया, अपने योग्य स्थान पर रहने वाले सभी लोग आनन्दित थे, इस प्रकार की सेना को सेनापति ने गर्व के साथ देखा।
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