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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 49
यद्यप्येतानि चान्यानि तन्निमित्तान्यवारयन्। तथापि सरणोत्याहं नामुञ्चन्नमुचिर्यथा ।।
इस प्रकार के एवं अन्य निमित्तों के द्वारा उसके मार्ग को रोकने पर भी उसने इन्द्र के समान युद्ध के उत्साह को नहीं छोड़ा।
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