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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 46
जितानेकप्रतिभटाः प्रसभं समरोद्धटाः। घोरकर्मकृतो घोरफटा अपि तमन्वयुः ।। पाण्डरो नायकचैव खराटोऽपि च नायकः। कल्याणयादवश्चापि नैकसैनिकनायकः ।। समुद्यद्युद्धसंरम्भो मम्बो भूशबलस्तथा। विश्वविश्रुतकर्माणो घाण्टिकाः काण्टिका अपि ॥ इत्येतेऽन्ये च राजानः सामन्ताथ सहस्रशः। चतुरङ्गचभ्युक्तास्तं सेनापतिमन्वयुः ।।
जिसने बलपूर्वक अनेक शत्रुओं को जीता है, ऐसा युद्ध में निपुण, भयंकर कार्य का कर्ता, घोरपड़े भी उसके पीछे पड़ गया। पांढरे नाईक, खराटे नाईक, अनेक सैनिकों का नायक कल्याण यादव, जिसके युद्ध का आवेश प्रचंड है ऐसा मंबाजी भोसले, जगत् प्रसिद्ध पराक्रम के कर्त्ता घांटगे एवं कांटे और दूसरे राजा एवं हजारों सामन्त चतुरंगिनी सेना के साथ उस सेनापति के पीछे गये।
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