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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 45
अम्बरः शम्बरसमः प्रतापी याकुतः पुनः। महामानी मुखेखानः पठानो हसनोऽपि च।। रणदूलहसूनुश्च रणदूलहसंज्ञकः। तथैवाङ्‌कुशखानोऽपि निरङ्कुशगजक्रमः ।। बर्बरः खेलकर्णस्य प्राप्तो यः क्रीतपुत्रताम्। स हिलालो महाबाहुः प्रत्यर्थिद्रुमकुञ्जरः ।। इत्येतेऽन्ये च यवनाः ससैन्याः ससुहृद्रणाः। सद्यः स्वामिसमादिष्टाः तं सेनापतिमन्वयुः ।।
शबर राक्षस के समान अंबर और प्रतापी याकुत, अभिमानी मुसेखान, हसन पठाण, रणदुल्लाखान का रणदुल्ला नामक पुत्र निरंकुश हाथी के समान अंकुशखान भी, खेलकर्ण का खरीदा गया पुत्र बर्बर और शत्रुरूपी वृक्षों के लिए हाथी के समान महाबाहु हिलाल और सेना से एवं मित्रों के समुदाय से युक्त दूसरे मुसलमान शीघ्र ही स्वामी की आज्ञा से उस सेनापति के पीछे गये।
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