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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 43
प्रचलन्तममुं तावत् प्रणमन्तं मुहुर्मुहुः। पदे पदेऽनुजग्राह दिशन्नीशो दयादृशम्।।
बारंबार मुजरा करने वाले एवं प्रस्थान किये हुए उस अफजलखान पर पग-पग पर कृपादृष्टि डालकर स्वामी ने कृपा की।
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