स्वामिनैवाथ विन्यस्तां प्रेम्णा सारसनान्तरे। सरत्नकोषाभरणां स बभाव कटारिकाम् ।।
फिर स्वामी ने ही प्रेमपूर्वक उसके कमर के पट्टे में लटकाई हुई, रत्नजडित म्यान में स्थित एवं आभूषणों से युक्त कटार को धारण किया।
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