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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 40
वज्रधारामिव शितां रत्नकोषनिवेशिताम्। निजां पाणिस्थितां प्रादात्प्रभुस्तस्मै कृपाणिकाम्।।
वन की तीक्ष्णता के समान पैनी, रत्नजडित म्यान में रखी हुई, अपने हाथ में स्थित स्वयं की कटार अल्लीशाह को दी।
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