द्विषद्वर्गक्षयकरी जागर्ति किल या मयि। कार्यमादिशता साद्य शक्तिरुत्तेजिता त्वया ।।
शत्रुओं के नाश करने की जो शक्ति मेरे में जागृत अवस्था में विद्यमान है, उसको आज आपने मुझे कार्य बताकर उसको जागृत किया।
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