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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 32
अफजल उवाच - विश्वम्भेणापि च प्रेम्णा यदाज्ञापयति प्रभुः। तस्य कर्ता स एव स्यात् गुणीभूतस्तु किंकरः ।।
अफजलखान बोला - विश्वास एवं प्रेमपूर्वक जो स्वामी आज्ञा देता है, उसका कर्ता तो स्वामी ही होता है, सेवक केवल निमित्तमात्र है।
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