अफजल उवाच -
विश्वम्भेणापि च प्रेम्णा यदाज्ञापयति प्रभुः। तस्य कर्ता स एव स्यात् गुणीभूतस्तु किंकरः ।।
अफजलखान बोला - विश्वास एवं प्रेमपूर्वक जो स्वामी आज्ञा देता है, उसका कर्ता तो स्वामी ही होता है, सेवक केवल निमित्तमात्र है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।