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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 30
तस्मात्वमेव गत्वा तं कृतदुर्गपरिग्रहम्। सविग्रह ग्रहमिव निगृह्यानय दुर्ग्रहम्।।
इसलिए तू ही जाकर दुर्ग का आश्रय लेकर रहने वाले उस दुर्जय शिवाजी को मूर्तिमत ग्रह की तरह जीवित पकड़कर ले आ।
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