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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 28
तज्जयाय पुरा वीरान् यान्यान्प्रास्थापयं मुहुः। न प्राप्ताः पुनरावृत्तिं ते तं प्राप्य प्रतापिनम् ।।
पहले जिन-जिन वीरों को, इसको जीतने के लिए बारंबार भेजा था। वे वीर इस प्रतापी को प्राप्त करके पुनः वापिस नहीं आयें।
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