दिने दिने वर्धमानः प्रतापेन सह श्रिया। अयमाश्रीयते भूपैराकांक्षितसमृद्धिभिः ।।
प्रतिदिन प्रताप एवं संपत्ति के द्वारा इसके वृद्धि को प्राप्त होने से धन के इच्छुक राजा इसकी अधीनता स्वीकार कर रहे हैं।
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