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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 22
स्थैर्यं निजामराष्ट्रस्य गृहीतस्यापि यत्नतः। अपि दिल्लीपतिर्नैव मनुतेऽस्माद्विश‌ङ्कितः ।।
प्रयत्नपूर्वक अधीन किये गए निजामशाह के राज्य की स्थिरता भी दिल्ली के बादशाह को इसके भय से संदेह युक्त प्रतीत होती है।
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