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शिवभारतम् • अध्याय 17 • श्लोक 20
अयं कौमारमाभ्य निकृतिप्रकृतिः स्वयम्। यवनानवजानाति जाग्रदुग्रपराक्रमः ॥
उग्र पराक्रमी और अपने कपटी स्वभाव से जागरूक शिवाजी, कौमार अवस्था से ही यवनों का अपमान करते आया है।
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