स चन्द्रराजं निर्जित्य पुत्रामात्यसमन्वितम्। जयवल्लीं च नगरीमग्रहीन्निरवग्रहः ।।
पुत्र एवं मन्त्रियों के साथ चंद्रराव मोरे को जीतकर इसने बिना किसी प्रतिबंध के जयवल्ली को अधीन कर लिया।
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