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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 9
नूनं पिपीलकोऽप्येकः प्रविश्य करिणः करम्। भवत्य‌ङ्करस्तस्मादल्पं मन्येत नो परम्।।
वास्तव में एक चींटी भी हांथी के सूंड में घुसकर उसका विनाश कर देती है। अतः शत्रु को कभी भी क्षुद्र नहीं समझना चाहिए।
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