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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 7
नावज्ञेयाः खलु ज्ञेन वराका अपि विद्विषः। प्रशाम्यते पतङ्गेन प्रज्वलन्नपि दीपकः ।।
दीनहीन शत्रु के होने पर भी विद्वान् को उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जलते हुए दीपक को भी कीट-पतंग बुझा देते हैं।
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