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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 53
न दुर्ग दुर्गमित्येव दुर्गमं मन्यते जनः। तस्य दुर्गमता सैव यत्प्रभुस्तस्य दुर्गमः ॥
दुर्ग को केवल दुर्ग कहने से लोग दुर्ग नहीं मानते हैं, अपितु उसके स्वामी का दुर्गम होना ही उसकी दुर्गमता होती है।
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