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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 50
अमू उभयतो यस्य द्वेषणी रोषणौ तव। तस्य नूनमिहस्थाने स्थितिः स्थाने न संप्रति ।।
ये दोनों शत्रु, दोनों तरफ से आप पर क्रोधित हो गये है, अतः आपका यहां रहना सम्प्रति वास्तव में योग्य नहीं है।
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