मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 5
अप्रमत्तोपि यो मत्तो द्विषते सिह्मपर्वतम्। आदापयद्येदिलाय किं वक्ष्ये तं महाव्रतम्।।
ज्ञानी होते हुए भी जिस पागल ने शत्रु आदिलशाह को मेरे से सिंहगड़ दुर्ग दिलवाया, ऐसे महाव्रती पुरुष को मैं क्या कहूँ?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें