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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 48
फतेखानप्रभङ्गेन मुसेखानवधेन च। अहर्दिवं प्रभो तुभ्यं महमूदोऽभ्यसूयति ।।
फत्तेखान की पराजय से एवं मुसेखान के वध के कारण से हे महाराज! महमूदशाह रात-दिनं आपसे द्वेष करता है।
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