इन सात अंगों से युक्त राज्य का धर्म आत्मा है, मन्त्र प्राण है, नीति यह बल है और अनीति दुर्बलता है। यथोचित दण्ड विधान यह शौर्य, शत्रु की उद्दण्डता अधर्म, आपस में भेद करना यह मद, दृढता, दीर्घायु है, लोकानुरंजन उत्कर्ष, दूरदर्शिता ही दृष्टि है, पराक्रम यह उज्ज्वल स्वरूप, आयुध यह विमल बुद्धि, उसी प्रकार बलवान् के साथ शत्रुता विघ्न कहा गया है, प्रमाद यह निन्द्रा और सावधानी यह जागृत अवस्था कही गई है।
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