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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 44
मौळिर्नृपो मुखं मन्त्री धनसैन्ये भुजद्वयम्। राष्ट्रमन्यद्वपुस्सर्वं सुहृदस्सन्धयो दृढाः ॥ दुर्भाणि तु दृढान्युच्चैस्तदस्थीनि तदन्तरा। एवम‌ङ्गानि राज्यस्य सप्तोक्तानि मनीषिभिः ।।
राजा का यह मस्तक है, मन्त्री मुख है, धन और सेना ये भुजाएं हैं, सम्पूर्ण राष्ट्र का यह शरीर है, मित्र यह शरीर है, मित्र यह जोड़ है और दुर्ग यह उसमें स्थित मजबूत हड्डी है, इस प्रकार विद्वानों ने राज्य के सात अंग बताये हैं।
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