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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 4
सोऽज्ञास्यद्यहिं मां तर्हि नादास्यत्सिह्यपर्वतम्। कोऽन्यथा तरसा जेष्यत्तमिम मत्करस्थितम्।।
यदि मुझे पहचानता तो वह सिंहगढ़ दुर्ग को देता ही नहीं, क्योंकि नहीं तो मेरी अधीनता में स्थित इस दुर्ग को बलपूर्वक कौन जीत सकेगा?
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