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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 38
गिरयो नैव गुरवो गुरुरेव गुरुर्मतः। भवतात्र प्रभवता दत्तः सिहाचलस्तत ।।
दुर्ग इतने मूल्यवान् नहीं है, वास्तव में पिता ही बहुमूल्य है, अतः पराक्रमी होते हुए भी तुमने सिंहगड़ दुर्ग को दिया।
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