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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 36
सप्तव्यसनसक्तत्वादजानानच्छलं बलम्। मन्यते प्रभुमात्मानमह‌ङ्कारेण केवलम् ।।
इन सात व्यसनों में आसक्त होने से वह शत्रु के कपट रूपी बल को न जानता हुआ, केवल अहंकार से अपने को समर्थ समझता है।
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