तत्पश्चात् कुछ लोग उसको छोड़ देते हैं, कुछ उसके प्रति उदासीन रहते है, कुछ उसके शत्रुपक्ष के साथ मिलकर सुख से रहते हैं, कुछ उसको क्रोधी समझकर शाप देते हैं और कुछ उसको न छोड़ते हुए भी पहले की तरह उसकी सेवा नहीं करते है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।