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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 34
ततो ह्यनुक्षणकृतासूक्षणक्षतचेतसः। परोक्षे परिभाषन्ते यथाचोपहसन्त्यमुम्।।
तत्पश्चात् प्रतिक्षण किये गए उनके अनादर के कारण अन्तकरण से खिन्न होकर वे उसके परोक्ष में वार्तालाप करते हैं और उसका उपहास भी करते हैं।
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