अथ क्रोधोद्धरोत्युच्चैरुच्चरन् रुशतीं गिरम्। दिगे दिने तुदत्येनान् समेतानपि संसदि।।
फिर अत्यन्त क्रोध के आवेश में आकर संसद में इकट्ठे हुए लोगों को ही प्रतिदिन उच्चध्वनि में भाषण देकर उनको पीड़ित करता है।
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