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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 31
तत्तद्वासनसक्तस्य वैचित्यमुपचीयते। वैचित्योपचायदुच्चैरौचित्यमपचीयते ।।
नाना प्रकार के व्यसनों से राजा का भ्रम वृद्धि को प्राप्त होता है और उसमें अतिशय वृद्धि हो जाने से उसका औचित्यपूर्ण व्यवहार नष्ट हो जाता है।
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