मुष्णन्त्युचैः प्रमत्तेऽस्मिन् कोश कोशाधिकारिणः। तुदन्ति च दुरात्मानो राष्ट्र राष्ट्राधिकारिणः ॥
उसके अत्यधिक प्रमत्त हो जाने पर तो कोषाधिकारी खजाने को चुरा लेता है और दुष्ट राष्ट्र के अधिकारी प्रजा को पीड़ित करते हैं।
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