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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 3
अजानानो न जानातु सुखेनैव सतो गुणान् । जानानो यन्न जानीते तहुनोति हि सन्मनः ॥
अज्ञानी ने यदि सज्जन के विद्यमान गुणों को नहीं जाना तो न जाने किन्तु ज्ञानी ने भी यदि नहीं जाना तो वह बात सज्जन के मन को पीडित करती है।
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