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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 25
समर्थश्वासमर्थ थेत्युपायो द्विविधो मतः। द्वितीयो ह्यवकेशी स्यात् प्रथमस्तु फलेग्रहिः ॥
समर्थ और असमर्थ ऐसे दो प्रकार के उपाय है। दुसरा उपाय निष्फल होता है किन्तु पहले प्रकार का उपाय सफल होता है।
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