मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 22
ऊनोपि यदि दूनोयमिति मत्वाऽनुनीयते। ततिः श्लाध्यमानोऽसौ स्वमेव बहुमन्यते ।।
यह दुःखी है, इस प्रकार मानते हुए यदि न्यून सामर्थ्यवान् शत्रु की सांत्वना की जाए तो वह अपने आपमें प्रशंसनीय होकर, अपने को बड़ा समझने लगता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें