शिव उवाच-
जानतामतिमूर्धन्यं ये धन्यं जानते जनाः। स मां नूनं न जानीते महाराजो महामनाः ।।
शिवाजी बोला - जिस धन्य पुरुष को लोग ज्ञान पुरुषों में अत्यन्त श्रेष्ठ समझते हैं, ऐसे मुझ को यह महामना शहाजी राजा वास्तव में नहीं पहचानते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।