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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 12
यः परस्माद्विभेत्युच्चैः परस्तस्माद्विभेति च। न विभेति परस्माद्यः परस्तस्माद्विभेति हि।।
जो शत्रु से भयभीत होता है, उससे भी शत्रु भयभीत रहता है, फिर जो शत्रु से भयभीत नहीं होता, उससे तो शत्रु भयभीत होता ही है।
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