शत्रु के द्वारा पकड़े हुए मेरे पिता शहाजी की कारावास में जो अवस्था थी, उसका प्रतिशोध लेने के लिए मैं पूर्णतः तैयार हूं और आज से ही यवनों के विनाश के कारण मेरी इस संसार में पहचान होगी।
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