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शिवभारतम् • अध्याय 16 • श्लोक 1
कवीन्द्र उवाच- अधाभिमतलाभेन महमूदेऽतिनिर्वृते । स्वयं तु तु पितरर्थाय वितीर्ण सिंहपर्वते ।। आहूय स्वर्णशर्माणमग्रजन्मानमन्तिके। शिवोद्धा मंत्रवित्तत्तन्मन्त्रवेदिनमब्रवीत ।।
कवीन्द्र बोले - तत्पश्चात्, अभीष्ट सिद्धि हो जाने से महमूदशाह अत्यन्त आनन्दित हुआ। किन्तु केवल पिता के लिए स्वयं ही सिंहगड़ को देने पर, कुटनीति में निपुण शिवाजी ने रणनीतिकार सेनोपंत नाम के ब्राह्मण मन्त्री को समीप बुलाकर कहा।
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