कवीन्द्र बोले - तत्पश्चात्, अभीष्ट सिद्धि हो जाने से महमूदशाह अत्यन्त आनन्दित हुआ। किन्तु केवल पिता के लिए स्वयं ही सिंहगड़ को देने पर, कुटनीति में निपुण शिवाजी ने रणनीतिकार सेनोपंत नाम के ब्राह्मण मन्त्री को समीप बुलाकर कहा।
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