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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 9
मुहुराहूयमानोऽपि नायातोऽयमुपह्वरे। अपातयदयं हास्मज्जयं संशयगह्वरे ।।
बार-बार बुलाने पर भी यह समीप नहीं आया एवं इसने ही हमारे विजयश्री को संशयरूपी गर्त में गिरा दिया।
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