चिररात्राय पित्रेव येनायं परिपालितः ।
स निजामोऽप्यनेनोच्चैर्निकृतिस्थेन वञ्चितः ।।
जिसने पिता के समान इसका बहुत समय तक पालन-पोषण किया था, ऐसे उस कपटी शहाजी ने इस निजाम को भी अपनी जाल में फंसा दिया।
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