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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 45
स तदा जगदाह्लादतत्परः परसङ्कटात्। मुमुचेऽम्भोधरघटापटलादिव चन्द्रमाः ।।
तब, जिस प्रकार मेघ समूह के आवरण से चन्द्रमा मुक्त होता है, उसी प्रकार संसार को आनन्द देने वाला शहाजी बड़े संकटों से मुक्त हो गया।
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