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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 44
अथ तस्य विमुक्तस्य सत्कृतस्य यथायथम्। येदिलः सदनद्वारि द्विरदाश्वमबन्धयत्।।
तत्पश्चात् कैद से मुक्ति पाकर एवं यथायोग्य सत्कार प्राप्त किये हुए उस शहाजी के महलद्वार पर आदिलशाह ने हाथी और घोड़े बंधवा दिये।
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