समृद्धिमधिकां लब्ध्वा दुर्मदात्मा मदाश्रयात्।
साहसी शाहराजोऽयं मन्नियोगं न मन्यते ।।
मेरे आश्रय से ही अत्यधिक समृद्धि को प्राप्त करके उन्मत्त हुआ, यह साहसी शहाजी राजा मेरे आदेश को भी नहीं मानता है।
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