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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 39
न सौहित्यं विना पानं विना प्राणं न विग्रहः। विराजते महाराज नानुयानं विना नुगः ।।
तृप्ति के बिना पीने में आनन्द नहीं है एवं प्राण के बिना शरीर शोभा नहीं देता है, हे महाराजा! स्वामी का अनुसरण किये बिना सेवक सुशोभित नहीं होता है।
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