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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 37
नियुञ्जते नियोगर्हान् कार्यायार्याः क्षणे क्षणे। तन्न कुर्वन्ति ते तर्हि को हेतुः शीलरक्षणे ।।
श्रेष्ठ लोग सेवकों को प्रतिक्षण कार्य में ही नियुक्त करते हैं। यदि उन्होंने उस काम को नहीं किया तो उनके शीलरक्षण का क्या लाभ हैं?
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