न हि मां मुञ्चतितमां सिंहशैलग्रहाग्रहः।
मदीयेन नियोगेन शिवायास्तु पुरन्दरः ॥
सिंहगढ़ अधीन करने का मेरा निश्चय मुझे मूलतः नहीं छोड़ रहा है। किन्तु मेरे आवेश से पुरन्दर शिवाजी के पास ही रहने दो।
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