शिक्षयस्व कनीयांसं तनयं गर्वपर्वतम्।
महाराज मदीयं में देहि तं सिंहपर्वतम् ।।
हे महाराजा! अभिमान के पर्वत से युक्त ऐसे तेरे छोटे बेटे को उपदेश करो और मेरे सिंहगड़ को मुझे दे दो।
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