उपकारं परकृतं स्मरन्ति स्वकृतं न ये।
त एव धारणावन्तः कृतज्ञाश्च सतां नये ।।
जो लोग दूसरे के द्वारा किए गए उपकार को याद रखते हैं एवं अपने किये हुए उपकारों को भूल जाते हैं, वे ही लोग सज्जनों की दृष्टि में स्मरणशील एवं कृतज्ञ है।
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