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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 31
अपकारसहस्राणि करोत्वलमसज्जनः । उपकारसहस्राणि करोत्येव तु सज्जनः ।।
दुर्जन हजारों अपकारों को करता है तो भी सज्जन उस पर हजारों उपकार करता ही हैं।
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