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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 30
एकामप्युपकारस्य कणिकां प्राप्य निर्वृताः । शतमप्यपकाराणां न स्मरन्ति महाव्रताः ॥ अणुनाप्यपकारेण परिक्षुभितमानसाः। उपकारसहस्राणि न स्मरन्त्यपचेतसः ॥
उदारचेत लोग अत्यधिक लघु उपकार से ही संतुष्ट होकर सैंकड़ो अपकारों को भूल जाते हैं और शुद्र मन वाले लोग लघु अहित से ही विचलित होकर हजारों उपकारों को भूल जाते हैं।
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